Tata Consultancy Services Limited ने शेयरहोल्डर्स को जानकारी दी है कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक सोमवार, 12 जनवरी 2026 को होने वाली है।
इस बैठक में अन्य एजेंडा के साथ शेयरहोल्डर्स के लिए तीसरे इंटरिम डिविडेंड पर विचार किया जाएगा।
इंटरिम डिविडेंड के साथ-साथ 12 जनवरी 2026 की तारीख TCS के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि इसी दिन कंपनी अपने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के तीसरे क्वार्टर के रिजल्ट भी घोषित करने वाली है। यह फाइनेंसियल रिजल्ट 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई अवधि के लिए होंगे और इन्हें सोमवार को मार्केट ऑवर्स के बाद जारी किया जाएगा। अर्निंग्स रिलीज़ कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा।
TCS इंटरिम डिविडेंड 2026 – लेटेस्ट अपडेट फॉर रिकॉर्ड डेट
खास बात यह है कि डिविडेंड की राशि घोषित होने से पहले ही कंपनी ने इसकी रिकॉर्ड डेट तय कर दी है।
अगर बोर्ड डिविडेंड को मंजूरी देता है, तो इसके लिए रिकॉर्ड डेट शनिवार, 17 जनवरी 2026 तय की गई है।
कंपनी के अनुसार, तीसरा इंटरिम डिविडेंड अगर घोषित किया जाता है, तो इसका भुगतान उन्हीं शेयरहोल्डर्स को किया जाएगा जिनके नाम शनिवार, 17 जनवरी 2026 को कंपनी के रजिस्टर ऑफ मेंबर्स (शेयरहोल्डर्स की आधिकारिक सूची) में दर्ज होंगे या डिपॉजिटरीज़ के रिकॉर्ड में दर्ज बेनिफिशियल ओनर (यानी असली शेयरहोल्डर्स) के तौर पर मौजूद होंगे।
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रिकॉर्ड डेट का क्या मतलब है?
रिकॉर्ड डेट वह कट-ऑफ तारीख होती है, जिसके आधार पर यह तय किया जाता है कि कौन-से शेयरहोल्डर्स डिविडेंड के पात्र होंगे। सरल शब्दों में, अगर किसी निवेशक का नाम रिकॉर्ड डेट तक कंपनी के रिकॉर्ड में मौजूद है, तभी उसे घोषित डिविडेंड का लाभ मिलता है।
TCS interim dividend 2026 से जुड़ी अहम जानकारी
TCS ने साफ किया है कि फिजिकल फॉर्म में शेयर रखने वाले शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड का भुगतान केवल इलेक्ट्रॉनिक मोड से किया जाएगा। इसके लिए जरूरी है कि उनका फोलियो पूरी तरह KYC कंप्लायंट हो, जिसमें PAN, मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट डिटेल्स और स्पेसिमेन सिग्नेचर का अपडेट होना शामिल है। यह प्रक्रिया रजिस्ट्रार एंड शेयर ट्रांसफर एजेंट (RTA) या सीधे कंपनी के पास पूरी की जा सकती है।
Dividend पर टैक्स और TDS से जुड़ा नियम
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत डिविडेंड इनकम शेयरहोल्डर्स के लिए टैक्सेबल होती है। इसी कारण TCS को डिविडेंड का भुगतान करते समय TDS काटना पड़ता है। TDS की दर शेयरहोल्डर के रेज़िडेंशियल स्टेटस और कंपनी द्वारा स्वीकार किए गए दस्तावेज़ों पर निर्भर करेगी। कंपनी ने बताया है कि डिमैट फॉर्म में शेयर रखने वाले निवेशकों को अपना PAN अपने डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स (ब्रोकर) के साथ अपडेट करना चाहिए, जबकि फिजिकल शेयर के लिए PAN RTA के पास अपडेट होना जरूरी है।
अगर किसी शेयरहोल्डर ने PAN और आधार लिंक नहीं कराया है, तो उसका PAN निष्क्रिय माना जाएगा और उस स्थिति में section 206AA के तहत ज्यादा TDS दर लागू हो सकती है।
TDS छूट के लिए डॉक्यूमेंट जमा करने की आखिरी तारीख
जो योग्य शेयरहोल्डर्स फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में घोषित होने वाले डिविडेंड पर TDS में राहत या छूट चाहते हैं, उन्हें आवश्यक फॉर्म और दस्तावेज़ जमा करना होगा। ये दस्तावेज़ PDF या JPG फॉर्मेट में मंगलवार, 13 जनवरी 2026 रात 11:59 बजे तक ई‑मेल या निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जमा किए जा सकते हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि राहत केवल दस्तावेज़ों की पूरी तरह से सही और संतोषजनक प्रस्तुति पर निर्भर करेगी।
TCS ने शेयरहोल्डर्स से अपने हित में नॉमिनेशन सुविधा का विकल्प लेने की अपील की है। इससे सिक्योरिटीज का स्मूद ट्रांसमिशन सुनिश्चित होता है और अनक्लेम्ड एसेट्स के जमाव से बचाव होता है। कंपनी के अनुसार, समय पर KYC और नॉमिनेशन अपडेट रखने से डिविडेंड का भुगतान और भविष्य की प्रक्रिया सरल और सहज रहती है।
Tata Consultancy Services का संक्षिप्त परिचय
Tata Consultancy Services Limited भारत की सबसे बड़ी IT सर्विसेज कंपनियों में से एक है और Tata Group का हिस्सा है। यह कंपनी IT सर्विसेज, कंसल्टिंग और बिजनेस सॉल्यूशंस के क्षेत्र में काम करती है। इसके ऑपरेशंस वैश्विक स्तर पर फैले हुए हैं। TCS की गिनती देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित IT कंपनियों में होती है।
यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह की इन्वेस्टमेंट या ट्रेडिंग एडवाइस न समझें। शेयर मार्केट में पैसा लगाना जोखिम भरा होता है, इसलिए कोई भी फाइनेंशियल डिसीजन लेने से पहले किसी प्रोफेशनल एडवाइज़र से सलाह ज़रूर लें। किसी भी प्रॉफिट या लॉस के लिए लेखक या प्लेटफॉर्म ज़िम्मेदार नहीं होगा। यह प्लेटफॉर्म भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्राप्त Right to Freedom of Speech and Expression का पालन करते हुए केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कंपनी समाचार और फाइलिंग्स को आगे साझा करने का कार्य करता है।
इंटरिम डिविडेंड क्या होता है?
इंटरिम डिविडेंड वह डिविडेंड होता है जो कंपनी अपने सालाना या तिमाही मुनाफे में से वर्ष के दौरान, वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले, शेयरहोल्डर्स को देती है। यह आमतौर पर कंपनी के बोर्ड के फैसले के बाद घोषित होता है।
इंटरिम और फाइनल डिविडेंड में क्या अंतर है?
इंटरिम डिविडेंड साल के दौरान दिया जाता है जबकि फाइनल डिविडेंड साल के अंत में घोषित किया जाता है। इंटरिम डिविडेंड बोर्ड के निर्णय पर निर्भर होता है, जबकि फाइनल डिविडेंड को एजीएम में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेनी होती है।
क्या फाइनल डिविडेंड, इंटरिम डिविडेंड का जोड़ होता है?
नहीं। फाइनल डिविडेंड साल के अंत में घोषित किया जाता है और यह पूरी वित्तीय स्थिति और मुनाफे पर आधारित होता है। यह इंटरिम डिविडेंड का सिर्फ जोड़ नहीं होता।
कंपनी इंटरिम डिविडेंड क्यों देती है?
इंटरिम डिविडेंड साल के बीच निवेशकों को मुनाफे का हिस्सा देने के लिए दी जाती है, जबकि फाइनल डिविडेंड साल के अंत में कंपनी के कुल मुनाफे पर आधारित होता है।